The other view : The village girl writes


What does a village girl think? What does she feel about her village, her life and her future? All posts on Uncity so far are from the Urban expat. This post is a first hand view from a village girl, which she wrote in Hindi.  Please take the time to read it through.

Contributor : Neha Aarya

उत्तराखंड के ज़िले नैनीताल के सत्खोल गांव की सत्य कहानी.

(Scroll down for English Translation)DSCN4136

“उटी देह चनै आपी पौरु उवछ ” ये हैं उत्तराखंड के 13 ज़िले. इस में मेरा  घर नैनीताल ज़िले के रामगढ ब्लॉक में सत्खोल नमक एक गांव में है. इस गांव में १०० लोगों तक की आबादी है. यहाँ की मूल भाषा कुमाऊनी है. यहाँ पर अधिक सुख सुविधा नहीं है लेकिन वर्तमान में यहाँ अधिकतर लोगों के पास मोबाइल  टीवी बिजली शौचालय जैसी व्यवयस्था हैं. और ये व्यवस्था मेरे घर नहीं है. मैं और मेरी दो बेहेने व दो भाई टीवी देखने किसी के घर चले जाते हैं. देर होने पर घर डांट  भी मिलती है. कभी कभी अच्छी ख़ासी धुलाई भी हो जाती है! पढ़ाई करने का समय हमें कभी सुबह मिल जाता है. रात को हम नहीं पढ़ सकते हैं क्योंकि बिजली नहीं होती है. यहाँ पर लड़कियों की शादी भी बड़ी जल्दी कर देते हैं चाहे लड़का बेरोज़गार हो या अधिक उम्र का यह नही देखा जेया. कभी कही ज़बरदस्त भी लड़की का विवाह कर देते हैं जिससे दुष्परिणाम सामने आते हैं.

गांव में एक हंसने वाली बात यह है अगर किसी लड़की के पास फोन हो और वह अकेले कहीं चली जाए तो गांव वाले उस लड़की को ताने सुनाते हैं. वह चाहे नौकरी की तलाश में हो या कोई अन्य कार्य से जा रही हो. अगर कोई लड़का कहीं जाए उसे कोई भी कुछ नहीं कहता. उन्हे लगता है की अब लड़का बड़ा हो गया है. चाहे वह स्कूल जाने के बहाने छिप जाए या फिर नशे का आदि बने. यहाँ अधिकतर लड़के ऐसे  ही हैं.

यहाँ के लोग अधिक विश्वास भगवान पर करते हैं और मैं भी करती हूँ पर अंधविश्वास नहीं। अंधविश्वास एक समस्या है। लोग किसी भी बुरे हादसे के पीछे कारण को सच में नहीं समझाते बलकि उसका सारा दोष काल ग्रहण या शनि का मानते हैं।

सत्खोल इतना क्यों प्रसिद्ध है शायद कम लोग जानते हैं। यहाँ एक आश्रम है जिसका नाम श्री रामचंद्रा मिशन आश्रम सत्खोल है।. यहाँ लोग दूर देशों से आते हैं. हमारा घर पत्थर का है. सब को यह अधिक पसंद आता है. बहूत से लोग घर की फोटो खींचते हैं तो कई लोग चॉकलेट  टॉफी बिस्कुट आदि देते हैं।

अधिकतर लोग यहाँ कृषि करके अपना भरण पोषण करते हैं. अधिकतर लोग यहाँ  गाय बकरी भैंस पालते हैं. उत्तराखंड में ३२ लाख तक व्यक्तियों ने पलायन किया है. इस का मुख्य कारण बेरोज़गारी है. बेरोज़गारी की वजह से लोग और राज्यों में जा रहे हैं।

हमारे गांव में तो सबसे अधिक समस्या पानी की है. पानी के लिए यहाँ औरतों में लड़ाई हो जाती है. गर्मी में तो यही हाल रहता है. लड़ाई से दूर रहने के लिए हमारी मां हमे सुबह ३ बजे उठा देती है और ३:३० में पानी भरने के लिए ले जाती है. मुझे तो सुबह की नींद बड़ी प्यारी लगती पर उठना पड़ता है लेकिन पानी भर कर जब घर आते हैं तो मैं फिर सो जाती हूँ. ५ या ५ ३० मैं उठती हूँ.

यहाँ सभी औरतें जोखिम भरा कार्य करती हैं. गाय के चारे के लिए वो इतने बड़े बड़े पेड़ों पर चढ़ जाती हैं. घास काटने चट्टानों पर भी । इस कारण कई औरतें मौत का ग्रस बनी हैं. यहां शाम को आदमी अधिकतर शराब पिए नज़र आते हैं. शराब पी कर वह अपनी पत्नी बच्चों तथा मा बाप पर भी हाथ उठाते हैं. यह मुझे बिल्कुल नहीं भाता है. लेकिन मैं अपने गांव में खुशनसीब हूँ. मेरे पापा ना शराब पीते हैं और ना ही धूम्रपान करते हैं. यही कारण है की हम पाँच भाई बहन अच्छे से पढ़ रहें हैं. मा तथा पापा दोनो मेहनत करते हैं. मां किसी के यहाँ मज़दूरी करती है तो पापा सिलाई. बरसात में सिलाई करना मुश्किल हो जाता है लेकिन फिर भी मां गुज़ारा चला लेती है.

हमारी थोड़ी ग़रीबी को कम किया है चिराग ने. चिराग एक संस्था है जो किसी गरीब घर में ३ बच्चियों में से एक को खर्चा प्रदान करती है. मुख्य रूप से स्कूल की वो निशा (बहन) को ड्रेस, कॉपी, किताब, जूते, स्कूल फीस देते हैं और उसे घूमने भी ले जाते है. ये एक वरदान की तरह है.

दिसंबर, जनवरी, फ़रवरी – यह तीन महीने मुझे अधिक पसंद हैं क्योंकि इन महीनों में बरफ गिरती है और यह बरफ में हम सब मस्ती करते हैं. गोले बना कर एक दूसरे को मारते हैं. यह्न २०१४ में ६ इंच बर्फ गिरी. २०१५ में बर्फ हल्की सी गिरी. बर्फ गिरने पर मानो जैसे पेड़ों ने सफ़द चादर ओढ़ ली हो. बर्फ में चिड़ियों की १ – २ नई प्रजाति देखने को मिलती है. यहाँ बर्फ ३-४ दिन तक रहती है. हम ताज़ी बर्फ को गुड़ के साथ खाते हैं. यह बर्फ पेट के लिए तथा खेतों के लिए लाभदायक है.

शायद अपने गांव उत्तराखंड के बारे में मैने आपको काफ़ी जानकारी दे दी है लेकिन एक ऐसी बात है जिसको लेकर मैं काफ़ी परेशन हूँ. १२वी पास कर ली है. मां का कहना है आगे को पढ़ूंगी पर पापा मना कर रहे हैं. पापा का कहना है की हम तीनों बहने १२ तक ही पढ़ें. लेकिन मुझे आगे पढ़ना है. मैने भी पापा से कहा की मुझे और पढ़ना है तो पापा ने कहा मुझसे कुछ मत कहो, जो चाहो करो. मां ने कहा वह मुझे पढ़ाएंगी. पापा से खर्चे की माँग की तो पापा ने कहा की इतना खर्च मुझसे नहीं होगा, और बच्चों को भी तो पढ़ना है. मैं तो मां की तरफ हूँ लेकिन आगे की पढ़ाई का क्या होगा ये तो भगवान ही जाने.

शायद आप उटी, देह, चनै, आपी, पौरु, उवाच का अर्थ नहीं समझे होंगे. आओ मैं बतौन:

उ उत्तरकाशी

टी टीरी

दे देहरादून

ह हरिद्वार

च चम्पवत

ने नेनिटाल

आ आलमोरा

प पिठोरगरह

पौ पौरीगर्हवाल

रु रुद्रप्रयाग

उ उधमसिंघनगर

ब बागेश्वर

च चमोली

जय उत्तराखंड!

[मैंने जो आज ब्लॉग पर डाला है इस का सारा श्रेय अदिति दी को जाता है। इन्होंने ही मुझे इसकी जानकारी दीजो मेरे लिए बहुत अच्छा है। मैं दीदी का बहे दिल से शुक्रियादा करना चाहती हूँ और उनकी जिंदगी में कामयाबी की कामना करती हूँ।]

If you are inspired to act and help Neha, please reach out to us, as we are too. chetanyum@hotmail.com .

English Translation :

The story of Satkhol Village, Nainital District, Uttarakhand

“Uti, Deh, Chanai, Api, Pauru, Ubach” – these are 13 districts in Uttrakhand. Nainital is one of them. In the Ramgad block of this district lies a village, named Satkhol. In this village, there is a population of about a 100 people. Kumaoni is the language spoken here. There aren’t a lot of luxuries here, but most people have facilities like mobile phones, television sets, electricity and bathrooms in their homes. These facilities are not present in my house, so I, along with my two brothers and two sisters go to someone else’s house to watch TV. When we get late, we get a good scolding at home – sometimes we’re really really in trouble! In the mornings, we get some time to study, whereas at night that isn’t possible as there’s no electricity.

Here, girls get married off pretty early by their families. Whether the groom is financially stable or of an appropriate age is not taken into consideration. Sometimes the marriage is even forced, which has negative consequences. One funny thing about the village is that if a girl has a cell phone and she’s going somewhere alone, the village folk tell her off, irrelevant of whether she’s going for work or has some other important task to do. If a boy goes anywhere, nobody says anything to him. They think that the boy has grown up now, even though he might be skipping school or going out to drink. A lot of boys here are like that.

People here have a strong faith in God, and so do I, but not blind faith. Blind faith is a problem. People do understand the real reasons behind any bad incident and instead blame it on black magic or astrology.

Many people don’t know why Satkhol is so popular. There is an ashram here called Shri Ram Chandra Mission Himalayan Ashram Satkhol. People come here from far away places. Our house is made of stone and the visitors find it really nice so they take pictures of it and some people gives us chocolates and biscuits. We have a lot of fun with them.

Most people here earn their daily bread by doing agriculture and a lot of people raise cows, bulls and goats. In Uttarakhand, 32 lakh people have left their homes, mainly because of poverty. Poverty is causing people to shift to other states.

In our village, the worst problem we have is shortage of water. Women end up fighting over water in the summer. To keep us away from the fighting, our mother wakes us up at 3 am and takes us out to fill water at 3:30. My morning sleep is very dear to me, but I must wake up. Once we come back home, however, I go back to sleep and then wake up at around 5/5:30.

All women here do very risky work. To get feed for the cows, they climb really tall trees, as well as big rocks in order to cut grass. Because of this, a lot of women have fallen prey to death.
Most evenings, men are seen drinking. After getting drunk, they beat their wives and children and even their parents. This really bothers me. But I am lucky, my father does not drink, nor does he smoke. This is the reason the five of us have been able to properly receive an education. Ma and Papa work hard. Ma works at someone’s house and Papa is into stitching. It is difficult to stitch during the rains but Ma still manages to the run the house somehow.

Chirag has reduced our poverty a bit. Chirag is an organisation that takes up the education cost of one daughter in a poor household. They provide my sister Nisha with uniforms, text books, notebooks, her school fees, and take her out on trips sometimes. It has been like a boon for us.

December, January, February-these are three months that I really like, because it snows during these months and we have a lot of fun in the snow making snowballs and throwing them at each other. It snowed 6 inches in 2014. In 2015, there was light snow. When snow falls it feels like there are white blankets wrapped around the trees. During this time we get to see one or two new species of birds. The snow stays for about 3 to 4 days. We eat fresh snow with jaggery. The snow is beneficial for the stomach and the fields.

I think I have given you quite a bit of information about my village and Uttarakhand, but there is one thing that is really troubling me. I have passed 12th grade, and Ma says I should go ahead and study but Papa is refusing. He says that the three of us sisters should study only till 12th, but I want to study further. When I told Papa that I want to continue my education, he said “Don’t say anything to me, do what you want”. Ma said that she will help me study and she asked papa for money for my education. But Papa’s reply was “I will not be able to manage it, the others kids have to study as well”. I am on my mother’s side, but God only knows what will happen to my education in the future.

Perhaps you did not understand what Uti, Deh, Chanai, Api, Pauru, Ubach mean. Let me explain-

U- Uttarkashi
Ti- Tehri
Deh-  Dehradun
H- Haridwar
Ch- Champawal
Nai- Nainital
A-Almora
Pi- Pithorgarh
Pau-Paurigarwal
Ru- Rudraprayag
U- Udhamsinghnagar
Ba- Bageshwar
Ch- Chamoli

Jai Uttarakhand!

[All the credit for this post that I have made on this blog today goes to Aditi didi. She told me all about this stuff, which has been a very good thing for me. I want to thank her from the bottom of my heart and I hope that her life is full of success.]

If in the end you are inspired to act, please reach out to us, as we are too. chetanyum@hotmail.com .

About Neha Aarya. Neha is 18 years old; lives in Satkhol, Uttarakhand; has 4 siblngs; likes to write. She is passionate about education and hopes to become a police officer. You can read her poems and writings at https://nehaaryablog.wordpress.com/

Kudos to Aditi Dubey for bringing her to light (see Aditi’s other post at https://uncityblog.wordpress.com/2016/06/23/turning-off-the-sirens/ )

 

 

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